परिचय

मेरा परिचय

मेरा नाम पवन कुमार बजाज है। मेरे पिता का नाम स्वर्गीय श्री सत्यनारायण बजाज था। मेरा जन्म राजस्थान के लालगढ़ में हुआ। मेरी प्रारंभिक शिक्षा लालगढ़ स्थित जैन विद्यालय में हुई।

उच्च शिक्षा के लिए मैंने कलकत्ता विश्वविद्यालय, कोलकाता से वाणिज्य विषय में स्नातक अर्थात् बी.कॉम. की शिक्षा प्राप्त की। इसके साथ ही मैंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की।

शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात् व्यापार के सिलसिले में मुझे असम और जोधपुर में रहने का अवसर मिला। आगे चलकर इंदौर शहर मेरी कर्मभूमि बना। पिछले लगभग 30 वर्षों से मैं इंदौर, मध्य प्रदेश में प्लाइवुड व्यवसाय से जुड़ा हुआ हूँ।

व्यापार के साथ-साथ धार्मिक, सामाजिक और साहित्यिक गतिविधियों में भी मेरी निरंतर रुचि रही है। मेरा मानना है कि व्यवसाय व्यक्ति को आर्थिक रूप से सक्षम बनाता है, जबकि समाज और राष्ट्र के प्रति उसका दायित्व उसे वास्तविक अर्थों में सार्थक बनाता है।

आध्यात्मिक प्रेरणा

बचपन से ही मेरी दादी के माध्यम से मुझे आध्यात्मिक ज्ञान और रामचरितमानस के अध्ययन का संस्कार मिला। रामचरितमानस के आदर्शों, भगवान श्रीराम के चरित्र, भगवान श्रीकृष्ण के कर्मयोग और अन्य महापुरुषों के जीवन-दर्शन ने मेरे विचारों को गहराई से प्रभावित किया।

समय के साथ आध्यात्मिक चिंतन, सामाजिक अनुभव और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना मेरे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती गई।

लेखन की प्रेरणा

कोविड-19 महामारी के दौरान प्राप्त समय का उपयोग मैंने अध्ययन, चिंतन और लेखन में किया। इसी अवधि में मुझे कुछ पुस्तकों के लेखन का अवसर मिला।

इन पुस्तकों को लिखने का उद्देश्य केवल लेखक के रूप में पहचान बनाना नहीं था। मेरा उद्देश्य था कि युवा शक्ति, विद्यार्थी, व्यापारी, अभिभावक और सामान्य नागरिक अपने जीवन, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझें।

मेरा विश्वास

मेरा विश्वास है कि:

  • विद्यार्थी शिक्षा के साथ चरित्र और संस्कार भी प्राप्त करें।
  • युवा शक्ति राष्ट्र की ऊर्जा और दिशा बने।
  • व्यापारी ईमानदारी से अर्थव्यवस्था को मजबूत करें।
  • अभिभावक और वरिष्ठ पीढ़ी समाज को सही मार्गदर्शन दें।
  • प्रत्येक नागरिक राष्ट्रहित को अपने व्यक्तिगत हित से जोड़कर देखे।

यदि राष्ट्र का कल्याण होगा, तो अंततः पूरे विश्व का कल्याण होगा।